
तिरियगदिं अणुपत्तो भीममहावेदणउलमपारं ।
जन्मणमरणरहट्टं अणंतखुत्तो परिगदो जं॥1590॥
गति तिर्यंच प्राप्त की जिसमें महावेदना अपरम्पार ।
जन्म-मरण की रहट कही यह जिसके भेद अनन्त प्रकार॥1590॥
अन्वयार्थ : भयानक है महावेदना जिसमें, जिसका पार नहीं - ऐसी तिर्यंच गति को प्राप्त हुए जन्म-मरणरूपी घटीयंत्र को अनंतबार प्राप्त हुए हो, उसका चिन्तवन करो ।
सदासुखदासजी