
ेवेवध प्रकार रागि अरु नाना बाधायें ेतर्यक् गेत में ।
सदा रहि भय सभी आरि सि दि-ताड़न सब कष्ट सहि॥1594॥
विविध प्रकार रोग अरु नाना बाधायें तिर्यक् गति में ।
सदा रहे भय सभी ओर से पद-ताड़न सब कष्ट सहे॥1594॥
अन्वयार्थ : तिर्यंचगति में अनेक प्रकार के रोग, सर्व ओर से हमेशा भय, दुष्ट तिर्यंचों कृत, मनुष्यों कृत घोर वेदना, वचनकृत तिरस्कार तथा चरणों के घात, इनको दीर्घ काल तक भोगा ।
सदासुखदासजी