पियविप्पओगदुक्खं अप्पियसंवासजाददुक्खं च ।
जं वेमणस्सदुखं जं दुक्खंपच्छिदालाभे॥1598॥
इष्ट-वियोग जनित दुःख अथवा अप्रिय के संग रहने का ।
वांछित वस्तु न मिलने का दुःख और ईर्ष्या दुख भोगा॥1598॥

  सदासुखदासजी