दंडकसालठ्ठिसदणि डंगुराकंटमद्दणं घोरं ।
कुम्भीपाको मच्छयपलीवणं भत्तवुच्छेदो॥1602॥
दंडे कोड़े लाठी से पीटा जाना अरु मुष्टि प्रहार ।
काँटों पर फेका अरु तला तवे पर, अग्नि मस्तक पर॥1602॥

  सदासुखदासजी