दमणं च हत्थिपादस्स णिगलअंदूरवरत्तरज्जूहिं ।
वंधणमाकोडणयं ओलंवणणिहणणं चेव॥1603॥
हस्ति पाद से दमन, तथा साँकल से हाथ पैर बाँधे ।
रस्सी से वृक्षों पर लटकाया गड्ढों में भी गाड़ा॥1603॥

  सदासुखदासजी