
सरीरादो दुक्खाद होइ देवेसु माणसं तिव्वं ।
दुक्खं दुस्सहमवसस्स परेण अभिजुज्जमाणस्स॥1607॥
शारीरिक दुःख से भी ज्यादा दुःख मानसिक सुरगति में ।
सुरपति के आधीन हुआ वाहन बनकर अति दुःख भोगे॥1607॥
अन्वयार्थ : देवगति में अन्य देवों द्वारा वाहनादि बनाये जाने पर तथा महर्द्धिक देवों के आधीन-परवश हुए देवों को शारीरिक दु:ख से भी अधिक दु:सह मानसिक दु:ख होते हैं ।
सदासुखदासजी