पं-सदासुखदासजी
ण करेंति णिव्वुइं इच्छया वि देवा सइंदिया सव्वे ।
पुरिसस्स पावकम्मे अणुक्कमगे उदिण्णम्मि॥1624॥
पूर्व कर्म उदयानुक्रम में उदय पाप का जब आवे ।
इन्द्रादिक सब सुर नर चाहें किन्तु वेदना हर न सकें॥1624॥
सदासुखदासजी