ते अप्पणो वि देवा कम्मोदयपच्चयं मरणदुक्खं ।
वारेदुं ण समत्था धणिदं पि विकुव्वमाणा वि॥1626॥
दिव्य शक्ति सम्पन्न अतः जो विविध विक्रिया कर सकते ।
आयु क्षीण होने पर सुर भी मरण दूर नहिं कर सकते॥1626॥
अन्वयार्थ : कर्म का उदय है कारण जिसका, ऐसा अपने को आया मरण का दु:ख, उसे दूर करने को अतिशय विक्रिया करने वाले देव भी समर्थ नहीं हैं ।

  सदासुखदासजी