उज्झंति जत्थ हत्थी महाबलपरक्कमा महाकाया ।
सुत्ते तम्मि वहंते ससया ऊढेल्लया चेव॥1627॥
महाबली अरु महापराक्रम युक्त विशालकाय गज भी ।
जिस प्रवाह में बह जाते उसमें खरगोश स्वयं बहते॥1627॥
अन्वयार्थ : जिस नदी के महाप्रवाह में महाबल - पराक्रम के धारक और विशाल है काया जिनकी, ऐसे हाथी भी बहते चले जाते हैं । उस प्रवाह में खरगोश बह जायंे, इसमें क्या आश्चर्य है?

  सदासुखदासजी