
इच्चेवं कम्मुदओ अवारणिज्जोत्ति सुठ्ठु णाऊण ।
मा दुक्खायसु मणसा कम्मम्मि सगे उदिण्णम्मि॥1631॥
इसप्रकार अनिवार कर्म का उदय न इसको रोक सकें ।
भली भाँति यह बात जानकर उदय समय नहिं शोक करें॥1631॥
अन्वयार्थ : इसलिए भो कल्याण के अर्थी हो! इस प्रकार कर्म के उदय को अच्छी तरह अरोक जानकर अपने कर्म उदीरणा को प्राप्त होने पर मन में दु:ख मत करो ।
सदासुखदासजी