जदिदा अभूदपुव्वं अण्णेसिं दुक्खमप्पणो चेव ।
जादं हविज्ज तो णाम होज्ज दुक्खाइदंु जुत्तं॥1639॥
पहले कभी किसी को नहीं हुआ एेसा दुःख अहो क्षपक ।
यदि तुमको ही हुआ प्रथम तो दुःख करना है युक्त क्षपक॥1639॥
अन्वयार्थ : भो मुने! जो दु:ख पूर्व में अन्य को नहीं हुआ हो और तुम्हें ही ऐसा दु:ख उत्पन्न हुआ हो, तब तो दु:खी होना योग्य है, किन्तु संसार में पूर्व कर्म के उदय से सभी जीवों को दु:ख आते हैं, मात्र तुम्हें ही दु:ख नहीं आया है ।

  सदासुखदासजी