ण तहा दोसं पावइ पच्चक्खाणमकरित्तु कालगदो ।
जह भंजणा हु पावदि पच्चक्खाणं महादोसं॥1650॥
बिना त्याग के मृत्यु प्राप्त हो तो नहिं होता दोष महान ।
किन्तु त्यागकर भंग करे तो होता है बहुदोष महान॥1650॥
अन्वयार्थ : प्रत्याख्यान को लेकर फिर छोडे तो दोष होता है ।

  सदासुखदासजी