इहपरलोइयदुक्खाणि आवहंते णरस्स जे दोसा ।
ते दोसे कुणइ णरो सव्वे आहारगिद्धीए॥1657॥
इस भव अरु पर-भव में जो भी दुःखदायक होते वे दोष ।
भोजन की लम्पटता के कारण नर करता वे सब दोष॥1657॥
अन्वयार्थ : इस लोक में तथा पर लोक में मनुष्य को दु:ख देने वाले जो दोष हैं, वे सभी दोष मनुष्य को आहार की अतिगृद्धता से होते हैं ।

  सदासुखदासजी