अवधिट्ठाणं णिरयं मच्छा आहार हेदु गच्छंति ।
तत्थेवाहारभिलासेण गदो सालिसिच्छो वि॥1658॥
महामत्स्य भोजन के कारण मरकर सप्तम नरक लहे ।
संकल्प मात्र से सालिसिक्थ भी मरकर सप्तम नरक लहे॥1658॥
अन्वयार्थ : स्वयंभूरमण समुद्र का महामत्स्य आहार की गृद्धता से ही अनेक जीवों का भक्षण करके सप्तम नरक में जाता है और शालिशिक्य नाम का मत्स्य अत्यन्त अल्प शरीर का धारक, कोई भी जीवों को भक्षण करने की सामर्थ्य नहीं है, तो भी भोजन की तीव्र अभिलाषा करके ही सप्तम नरक में जाता है ।

  सदासुखदासजी