
णत्थि भयं मरणसमं जम्मणसमयं ण विज्जदे दु:खं ।
जम्मणमरणादंकं छिण्णममत्तिं सरीरादो॥1678॥
मरण-समान नहीं भय कोई जन्म-समान न दुःख जानो ।
जन्म-मरण रोगों का कारण, तन ममत्व यह दूर करो॥1678॥
अन्वयार्थ : इस संसार में मरणसमान भय नहीं और जन्मसमान दु:ख नहीं, अत: जन्मम रण के करने वाले इस शरीर का ममत्व छोडो ।
सदासुखदासजी