
तम्हा कलेवरकुडी पव्वोढव्वत्ति णिम्ममो दुक्खं ।
कम्मफल मुवेक्खंतो विसहसु णिव्वेदणो चेव॥1686॥
अतः त्याज्य यह काय कुटी - यह जान देह से निर्मम हो ।
कर्म कलों की करो उपेक्षा दुःख सहो ज्यों दुःख न हो॥1686॥
अन्वयार्थ : इसलिए भो कल्याण के अर्थी हो! यह कलेवर कुटी अत्यन्त त्यागने योग्य ही है, ऐसा जानना तथा यह देह कलेवर हमारा नहीं है, ऐसे ममतारहित होकर तिष्ठो! कर्म के फल में उदासीन होकर वेदनारहित के समान दु:ख को सहना योग्य है ।
सदासुखदासजी