इच्चेवमाइकवचं भणिदं उस्सीग्गयं जिणमदम्मि ।
अववादियं च कवयं आगाढे होइ कादव्वं॥1689॥
इसप्रकार जिनमत में कहा कवच का यह सामान्य स्वरूप ।
मृत्यु निकट होने पर करने योग्य कवच अपवाद स्वरूप॥1689॥
अन्वयार्थ : जिनेन्द्र के मत में इत्यादिक उत्सर्गिक कवच कहा है और अपवादिक कवच (विशेषरूप कवच) आगाढ/निश्चित मरण होने वाले को करना योग्य है ।

  सदासुखदासजी