
धम्मस्स लक्खणं से अज्जवलहुगत्तमद्दवोवसमा ।
उवदेसणा य सुत्ते णिसग्गजाओ रुचीओ दे॥1718॥
धर्म ध्यान के लक्षण जानो लघुता आर्जव और विनय ।
जिन आगम में स्वाभाविक रुचि भी है धर्म ध्यान लक्षण॥1718॥
अन्वयार्थ : इस धर्मध्यान का लक्षण आर्जव अर्थात् कपटरहित सरलता है तथा निष्परिग्रहता उसे लघुत्व अर्थात् भाररहितपना कहते हैं । जाति आदि अष्ट प्रकार के मदों का अभाव मार्दवधर्म का लक्षण है । उपशमभाव अर्थात् कषायों की मंदता है, जिनेन्द्र के सूत्रों का उपदेश करना तथा स्वभाव से ही पदार्थ की सत्यार्थ रुचि - ये धर्म के लक्षण जानना ।
सदासुखदासजी