
लोगो विलीयदि इमो फेणोव्व सदेवमाणुसतिरिक्खो ।
रिद्धीओ सव्वाओ सिविणयसंदंसणसमाओ॥1725॥
देव मनुज तिर्यंच सहित यह लोक अहो जल-फेन समान ।
क्षण भंगुर है तथा सर्व ऋद्धियाँ स्वप्नवत् नश्वर जान॥1725॥
अन्वयार्थ : देव, मनुष्य, तिर्यंचों सहित यह लोक फेन/झाग के समान विलय हो जाता है और सम्पूर्ण ऋद्धियाँ हैं, वे स्वप्न-दर्शन समान हैं ।
सदासुखदासजी