
चंदो हीणो व पुणो विढ्ढदि एदि य उदू अदीदो वि ।
णदु जोव्वणं णियत्तइ णदीजलमदछिदं चेव॥1731॥
क्षीण चन्द्रमा पुनः वृद्धिगत, बीती ऋतु भी फिर आए ।
किन्तु सरित-जलवत् यौवन यह बीते किन्तु न फिर आए॥1731॥
अन्वयार्थ : जगत में कृष्णपक्ष में हीन हुआ चन्द्रमा शुक्लपक्ष में वृद्धि को प्राप्त होता है और नक्षत्र अस्त होने पर भी पुनह्न उदय को प्राप्त होता हैअथवा हिम, शिशिर, वसन्त आदि ऋतुएँ इत्यादि जा जाकर पुन:-पुन: आती हैं, परन्तु गया हुआ यौवन वैसे ही वापस नहीं आता; जैसे नदी का जल गया हुआ पुन: वापस नहीं आता है ।
सदासुखदासजी