पाओदएण सुठ्ठु वि चेट्ठंतो को वि पाउणदि दोसं ।
पुण्णोदएव दुठ्ठु वि चेट्ठंतो को वि लहदि गुणं॥1741॥
पाप-उदय में सम्यक् चेष्टा करने पर भी हो बदनाम ।
पुण्य-उदय में पाप कार्य करनेवाले भी होंय सुनाम॥1741॥
अन्वयार्थ : कोई पुरुष दुष्ट चेष्टा करता हुआ भी गुणों को प्राप्त होता है/गुणवान कहा जाता है ।

  सदासुखदासजी