पं-सदासुखदासजी
णिरुवक्कमस्स कम्मस्स फले समुवट्ठिदम्मि दुक्खम्मि ।
जादिजरामरणरुजाचिंता भयवेदणादीए॥1743॥
कर्म निरुपक्रम के फल में हों जन्म-जरा-रोगादि अपार ।
चिन्ता भय वेदना आदि दुःख होते जिनका नहिं प्रतिकार॥1743॥
सदासुखदासजी