रोगाणं पडिगारो दिट्ठा कम्मस्स णित्थ पडिगारो ।
कम्मं मलेदि हु जगं हत्थीव णिरंकुसो मत्तो॥1750॥
औषधि से रोगों का हो प्रतिकार किन्तु नहिं कमाब का ।
यथा निरंकुश गज कुचले वन वैसे कर्म मसल देता॥1750॥
अन्वयार्थ : रोगों का प्रतीकार/इलाज होता जगत में देखा जाता है, परन्तु कर्म का उदय आने पर उसका इलाज नहीं दिखता ।

  सदासुखदासजी