
रोगाणं पडिगारो णत्थि य कम्मे णरस्स समुदिण्णे ।
रोगाणं पडिगारो होदि हु कम्मे उवसमंते॥1751॥
अशुभ उदय होने पर रोगादिक का भी प्रतिकार नहीं ।
कमाब का उपशम होने पर ही होता प्रतिकार सही॥1751॥
अन्वयार्थ : मनुष्य के असातावेदनीय कर्म की उदीरणा हो, तब रोगादि का इलाज नहीं होता है । जिस समय असातावेदनीय कर्म का उपशम होता है, उस समय औषधादि द्वारा रोग का इलाज होता है ।
सदासुखदासजी