
सीहतिमिंगिलगहिदस्स णत्थि मच्छो मगो व जध सरणं ।
कम्मोदयम्मि जीवस्स णत्थि सरणं तहा कोई॥1754॥
सिंह के मुख में पड़ा हिरण अरु मगरमच्छ मुख में मछली ।
कर्माेदय से घिरे जीव को कोई भी है शरण नहीं॥1754॥
अन्वयार्थ : जैसे वन में सिंह के द्वारा पकडा गया हिरण और जल में तिमिंगिल मत्स्य के द्वारा पकडा गया छोटा मत्स्य - इन दोनों को कोई शरण नहीं है; तैसे ही कर्म के उदय से ग्रस्त जीव को कोई शरण नहीं है ।
सदासुखदासजी