
सव्वो वि जणो सयणो सव्वस्स वि आसि तीदकालम्मि ।
पंते य तहाकाले होहिदि सजणो जणस्स जणो॥1765॥
सभी जीव हो चुके अन्य के सम्बन्धी गत काल में ।
सभी जीव होंगे सम्बन्धी सबके भावी काल में॥1765॥
अन्वयार्थ : अनंतकाल व्यतीत हो गया, उसमें सभी जीव अनंतबार स्वजन हुए हैं और भविष्य में अनंतबार लोगों के स्वजन होंगे । इसलिए किस-किस में स्वजनपने का संकल्प करेगा? जो अभी स्वजन मित्र दिखते हैं, वे भूतकाल में अनंतबार तेरे घात करने वाले शत्रु हो गये हैं और जो अभी शुत्र दिखते हैं, वे तेरे अनेक बार हितकारी मित्र हो गये हैं, और आगे होंगे । इसलिए इनमें राग-द्वेष बुद्धि करके अपना घात मत करो । सभी अन्य-अन्य हैं ।
सदासुखदासजी