
माया पोसेइ सुयं आधारो मे भविस्सदि इमोत्ति ।
पोसेदि सुदो मादं गब्भे धरिओ इमाएत्ति॥1769॥
माता सुत का पोषण करती, जान बुढ़ापे का आधार ।
सुत माता का पोषण करता, इसने दिया गर्भ आधार॥1769॥
अन्वयार्थ : यह पुत्र मेरा आधार है । इसके बिना दु:ख-दर्द में तथा वृद्धावस्था में अन्य कोई सहायी नहीं । इस अभिप्राय से पुत्र का पालन-पोषण करता है और इस माता ने मुझे गर्भ में रखा है - इस अभिप्राय से पुत्र माता का पोषण करता है अथवा माता का पोषण नहीं करूँगा तो जगत में कृतघ्नी कहलाऊँगा, जगत मुझे निंदेगा, इस कारण से पोषण करता है ।
सदासुखदासजी