एगविगतिगचउपंचिंदियाण जाओ हवंति जोणीओ ।
सव्वाउ ताउ पत्तो अणंतखुत्तो इमो जीवो॥1781॥
एकेन्द्रिय दो इन्द्रिय त्रय चौ पंचेन्द्रिय पर्याय अनन्त ।
हैं इस जग में जिन्हें जीव यह प्राप्त कर चुका बार अनन्त॥1781॥
अन्वयार्थ : एकेन्द्रिय, द्वीन्द्रिय, त्रीन्द्रिय, चतुरिन्द्रिय, पंचेन्द्रिय जीवों की ये योनि हैं । इन समस्त योनियों को संसारी जीव अनन्त बार प्राप्त हुआ है ।

  सदासुखदासजी