जत्थ ण जादो ण मदो हवेज्ज जीवो अणंतसा चेव ।
काले तीदम्मि इमो ण सो पदेसोे जए अत्थि॥1784॥
तीन लोक में एेसा कोई प्रदेश नहीं है जीव जहाँ ।
जन्म-मरण नहिं किये अनन्तों बार, क्षेत्र यह भ्रमण कहा॥1784॥
अन्वयार्थ : इस लोक का ऐसा एक भी प्रदेश शेष नहीं रहा है कि जहाँ पर यह अनन्तबार जन्मा और मरा न हो । अतीत/भूतकाल में तीन सौ तेतालीस राजू प्रमाण लोक के समस्त प्रदेशों में अनन्तानन्तबार जन्म लिया है और मरण किया है ।

  सदासुखदासजी