पं-सदासुखदासजी
तक्कालतदाकालसमएसु जीवो अणंतसो चेव ।
जादो मदो य सव्वेसु इमो तीदम्मि कालम्मि॥1785॥
भूतकाल में हुई अनन्तों उत्सर्पिणी अवसर्पिणी ।
प्रत्येक समय में जन्मा और मरा अनंत बार यह जीव॥1785॥
अन्वयार्थ :
इस जीव ने जन्म-मरण न किया हो ।
सदासुखदासजी