पं-सदासुखदासजी
लोगागासपएसा असंखगुणिदा हवंति जावदिया ।
तावदियाणि हु अज्झवसाणाणि इमस्स जोवस्स॥1787॥
लोकाकाश प्रदेशों को यदि असंख्यात से गुणा करें ।
इतने अध्यवसाय स्थानों में परिवर्तन-भाव करे॥1787॥
सदासुखदासजी