जणणी वसंततिलया भगिणी कमला य आसि भज्जाओ ।
धणदेवस्स य एक्कम्मि भवे संसारवासम्मि॥1807॥
मात बसन्ततिलका भगिनि कमला दोनों इसी भव में ।
पत्नी हुई धनदेव पुरुष की पर-भव की क्या बात करें॥1807॥
अन्वयार्थ : इस संसारवास में अन्य पर्यायों में जो अनेक संबंध हुए, उनकी बात तो दूर रही । एक ही भव में धनदेव नाम के वणिक पुत्र की वसंततिलका माता ही अपनी पत्नी हुई और एक पेट से उत्पन्न ऐसी कमला नाम की बहन भी स्त्री बन गई । जब एक जन्म में इतना अपवाद पाया तो अन्य जन्म की क्या कथा कहनी?

  सदासुखदासजी