राया वि होइ दासो दासो रायत्तणं पुणमुवेदि ।
इय संसारे परिवट्टंते ठाणाणि सव्वाणि॥1808॥
अरे! नृपति भी दास बने अरु दास नृपति पद को पावे ।
इसप्रकार इस जग के सब पद परिवर्तन के योग्य कहे॥1808॥
अन्वयार्थ : पापकर्म का उदय आता है, तब राजा तो दास हो जाता है और दास राजा हो जाता है । इस संसार में समस्त स्थान पलटते रहते हैं ।

  सदासुखदासजी