
बिमलाहेदुं वंकेण मारिओ णिययभारियागब्भे ।
जाओ जाओ जादिंभरो सुदिट्ठी सकम्मेहिं॥1813॥
भार्या के कारण सेवक से मारा गया सुदृष्टि सेठ ।
भार्या से उत्पन्न हुआ अरु पूर्वजन्म स्मरण हुआ॥1813॥
अन्वयार्थ : विमला नाम की स्त्री के लिये वक्र नाम के सेवक ने अपने स्वामी सुदृष्टि को मार डाला था । वह मरकर अपनी उसी स्त्री के गर्भ से पुत्र हुआ, पश्चात् उसे जातिस्मरण में पूर्व जन्म का स्मरण हो आया ।
सदासुखदासजी