
होऊण बंभणो सोत्तिओ खु पावं करित्तु माणेण ।
सुणको व सूगरो वा पाणो वा होइ परलोए॥1814॥
ब्राह्मण होकर भी श्रोत्रिय ने जाति-मान से पाप किया ।
शूकर श्वान तथा चाण्डाल योनि में उसने जन्म लिया॥1814॥
अन्वयार्थ : वेदांती ब्राह्मण होकर भी वह अभिमान से पाप उत्पन्न करके मरकर शूकर और चांडाल योनि में उत्पन्न हुआ ।
सदासुखदासजी