+ अब देह का अशुभपना दिखलाते हैं - -
अठ्ठिदलिया छिरावक्कवद्धिया मंसमट्टियालित्ता ।
बहुकुणिमभण्डभरिदा विहिंसणिज्जा खु कुणिमकुडी॥1823॥
हड्डी रूपी पत्ते, छाल सिरायें, मांस माटी लीपी ।
अशुचि वस्तु से भरी हुई अत्यन्त घृणास्पद काय कुटी॥1823॥
अन्वयार्थ : देह को कुटी समान वर्णन करते हैं । यह देहरूपी कुटी कैसी है? हड्डियों के टुकडोें से रची है, नसों के जालरूप बकल से बँधी है, मांसरूपी मिट्टी से लिप्त है और महादुर्गन्धित सडा हुआ मांस, रुधिर, मल, मूत्ररूप भांड/पदार्थ से भरा है, ग्लानि करने योग्य है, दुर्गन्ध कुटी समान है । इस प्रकार देहरूप कुटी का अशुभपना दिखाया ।

  सदासुखदासजी