
जम्मसमुद्दे बहुदोसवीचिए दुक्खजलयराइण्णे ।
जीवस्स परिब्भमणम्मि कराणं आसवो होदि॥1828॥
जन्मोदधि में दोष तरंगें उछलें, दुःखमय जलचर है ।
जीवों की परिभ्रमण हेतु यह एक मात्र बस आस्रव है॥1828॥
अन्वयार्थ : संसाररूप समुद्र में जीव को परिभ्रमण का कारण आस्रव है । कैसा है संसार समुद्र ? जिसमें बहुत दोष रूप लहरियाँ उठतीं हैं और दु:खरूप जलचर जीवों से भरा है ।
सदासुखदासजी