+ अब असंयम को कहते हैं - -
अविरमणं हिंसादी पंच वि दोसा हवंति णायव्वा ।
कोधादीया चत्तारि कसाया रागदोसमया॥1833॥
हिंसा आदिक पाँच पापमय परिणति को अविरमण कहा ।
क्रोध मान माया लोभादिक राग द्वेष कषाय कहा॥1833॥
अन्वयार्थ : हिंसा, असत्य, चोरी, कुशीलसेवन, परिग्रह में ममता - ये पंच दोष, ये अविरमण हैं । इन्हें ही असंयम कहते हैं । छहकाय के जीवों की दया नहीं पालना और पाँच इन्द्रियाँ तथा छठवें मन को वश में नहीं रहना - ये बारह अविरति हैं । पंचपाप के त्यागी को बारह अविरति का अभाव होता है और क्रोध, मान, माया, लोभ - ये चार कषायें हैं, वे राग-द्वेषमय हैं ।

  सदासुखदासजी