पुव्वकदकम्मसडणं तु णिज्जरा सा पुणो हवे दुविहा ।
पढमा विवागजादा विदिया अविवागजाया य॥1854॥
पूर्वबद्ध कमाब का खिरना कहें निर्जरा उभय प्रकार ।
पहली है सविपाक निर्जरा और दूसरी है अविपाक॥1854॥

  सदासुखदासजी