सव्वेसिं उदयसमागदस्स कम्मस्स णिज्जरा होइ ।
कम्मस्स तवेण पुणो सव्वस्स वि णिज्जरा होइ॥1856॥
सभी जीव को उदय प्राप्त कमाब की हो निर्जरा अरे ।
किन्तु सभी कमाब का खिरना होता है केवल तप से॥1856॥
अन्वयार्थ : सभी की उदय को प्राप्त हुए कर्म की निर्जरा होती है । जो उदय में आकर समय-समय में अपना रस देगा, वह समय-समय में निर्जरित होगा ही और समस्त कर्मों की निर्जरा तप से ही होती है ।

  सदासुखदासजी