
तवसा चेव ण मोक्खो संवरहीणस्स होइ जिणवयणे ।
ण हु सोत्ते पविसंते कि सिणं परिसुस्सदि तलायं॥1861॥
यदि तलाब में जल आता हो तो वह कभी नहीं सूखे ।
अतः बिना संवर के केवल तप से नहीं कर्म छूटें॥1861॥
अन्वयार्थ : जिनेन्द्र के परमागम में भगवान ने ऐसा कहा है - संवररहित पुरुष को तप करने पर भी मोक्ष नहीं होता है । संवरसहित तपश्चरण करने पर ही मोक्ष होता है । जैसे जिस तालाब में जल का प्रवाह निरंतर आता हो, वह तालाब पूरा कभी नहीं सूखता है । पहले नया जल आना रुक जाये, तब गर्मी के सूर्य के आताप से तालाब सूख ही जाता है; तैसे संवरपूर्वक तप ही मोक्ष का कारण होता है ।
सदासुखदासजी