सुहुमकिरियं खु तदियं सुक्कज्झाणं जिणहिं पण्णत्तं ।
वेंति चउत्थं सुक्कं जिणा समुच्छिण्णकिरियं तु॥1886॥
तीजा शुक्ल ध्यान कहते हैं सूक्ष्मक्रिया नामक जिनराज ।
चौथा शुक्ल ध्यान कहते हैं समुच्छिन्न क्रिया जिनराज॥1886॥
अन्वयार्थ : प्रथम शुक्ल ध्यान तो पृथक्त्ववितर्कवीचार है । एकत्ववितर्क अवीचार दूसरा शुक्लध्यान है । सूक्ष्मक्रिया अप्रतिपाति नाम का तीसरा शुक्लध्यान है । समुच्छिन्नक्रिया चौथा शुक्ल्ध्यान है ।

  सदासुखदासजी