
युद्ध भूेम में कवच समान कषायों सि रक्षा करता ।
ध्यान कवच त्यों करि क्षकि की, ध्यान ेबना रण में याद्धिा॥1900॥
युद्ध भूमि में कवच समान कषायों से रक्षा करता ।
ध्यान कवच त्यों करे क्षपक की, ध्यान बिना रण में योद्धा॥1900॥
अन्वयार्थ : जैसे रणभूमि में बख्तरादि आवरण रहित योद्धा है, तैसे ही ध्यानरहित क्षपक है ।
सदासुखदासजी