वइरं रदणेसु जहा गोसीरं चंदणं व गन्धेसु ।
वेरुलियं व मणीणं तह ज्झाणं होइ खवयस्स॥1903॥
ज्यों रत्नों में हीरा गन्धित द्रव्यों में चन्दन है श्रेष्ठ ।
मणियों में वैडूर्यमणि त्यों ध्यान सर्व भावों में श्रेष्ठ॥1903॥
अन्वयार्थ : जैसे रत्नों में हीरा प्रधान/मुख्य है, सुगंधित द्रव्यों में गोशीर चंदन प्रधान है, मणियों में वैडूर्य मणि प्रधान है, तैसे ही क्षपक के समस्त व्रत-तपों में ध्यान प्रधान है ।

  सदासुखदासजी