झाणं कसायपरचक्कभए बल वाहणढ्ढओ राया ।
परचक्कभए बल वाहणढ्ढओ होइ जह राया॥1907॥
बल-वाहन से युक्त नृपति शत्रु सेना से करता त्राण ।
कषाय शत्रु से रक्षा करता ध्यानरूप बल नृपति समान॥1907॥
अन्वयार्थ : जैसे परचक्र का भय होते ही बलवान वाहन पर चढा हुआ राजा रक्षा करता है, तैसे ही कषायरूप परचक्र का भय होते ही बलवान साम्यभावरूप वाहन ऊपर चढा ध्यान ही रक्षा करता है ।

  सदासुखदासजी