झाणं कसायरोगेसु होदि वेज्जो तिगिंछिदे कुसलो ।
रोगेसु जहा वेज्जो पुरिसस्स तिगिंछिदे कुसलो॥1908॥
वैद्य पुरुष रोगों से रक्षा करने में है कुशल सुजान ।
राग-रोग की करे चिकित्सा कुशल वैद्य यह ध्यान महान॥1908॥
अन्वयार्थ : जैसे रोग होने पर पुरुष के रोग का इलाज करके निरोग करने वाला प्रवीण वैद्य होता है; तैसे ही कषाय-रोग के होने पर रोग को नाश करने में समर्थ यह ध्यान प्रवीण वैद्य है ।

  सदासुखदासजी