किण्हा णीला काओ लेस्साओ तिण्णि अप्पसत्थाओ ।
पइसइ विरायकरणो संवेगमणुत्तरं पत्तो॥1915॥
कृष्ण नील कापोत अशुभ लेश्याओं का करके परित्याग ।
हो अत्यन्त भयातुर जग से भाता है भावना विराम॥1915॥
अन्वयार्थ : कृष्ण, नील, कापोत - ये तीन अप्रशस्त (बुरी) लेश्यायें हैं । जिनके वीतराग परिणाम हैं और सर्वोत्कृष्ट धर्मानुराग को जो प्राप्त हुआ है, वह पुरुष इन तीन लेश्यायों का त्याग कर देता है ।

  सदासुखदासजी