+ इन छहों लेश्यावालों के जो कार्य हैं, उनका दृष्टांत एेसा जानना -- -
एदेसिं लेस्साणं विसोधणं पडि उवक्कमो इणमो ।
सव्वेसिं संगाणं विवज्जणं सव्वहा होई॥1917॥
इन लेश्याओं की विशुद्धि का उपक्रम कहते हैं जिनराज ।
लेश्या में विशुद्धि का कारण सर्व संग का हो परित्याग॥1917॥
अन्वयार्थ : इन लेश्याओं को उज्ज्वल करने का यह इलाज है कि समस्त परिग्रह का सर्वथा त्याग करना परिग्रहधारियों के लेश्याओं की शुद्धता नहीं होती ।

  सदासुखदासजी