
लेस्सासोधी अज्झवसाणविसोधीए होइ जीवस्स ।
अज्झवसाणविसोधी मंदकसायस्स णादव्वा॥1918॥
लेश्या की विशुद्धि का कारण होते हैं विशुद्ध परिणाम ।
जिसकी होती मन्द कषाय उसी के हों विशुद्ध परिणाम॥1918॥
अन्वयार्थ : जीव के लेश्याओं की शुद्धता परिणामोें की शुद्धता से होती है और परिणामों की शुद्धता मंदकषाय के धारकों के होती है ।
सदासुखदासजी