अब्भंतर सोधीए बाहिरसोधी वि होदि णियमेण ।
अब्भंतरदोसेण हु कुणदि णरो बाहिरे दोसे॥1923॥
अभ्यन्तर में हो विशुद्धि तो बाह्य विशुद्धि नियम से हो ।
अभ्यन्तर में दोष होय यदि तन गत दोष नियम से हो॥1923॥
अन्वयार्थ : अभ्यंतर शुद्धता से बाह्य शुद्धता नियम से होती है और अभ्यंतर दोषों के कारण पुरुष बाह्य दोषों को करता है ।

  सदासुखदासजी